

चारण जाति मैं अवतार-
चारण जाति शक्ति उपासको मैं एक मुख्य जाति है!इस जाति के व्यक्ति को दूसरी जातियाँ देवी-पुत्र के नाम से संबोधित करती है! यही कारण है कि महाशक्ति को अवतार लेने के लिए चारण जाति ही अनुकूल जान पड़ी!चारण जाति मैं देवी के अनेक अवतार हुए!राजस्तान मैं देवियो की जो सामान्य रूप से स्तुति की जाती है, उनमे नॉ लाख लोवडीयाल पद का व्यवहार किया जाता है!जिसका तात्पर्य है कि देवी के आज तक साधारण और असाधारण कुल नॉ लाख अवतार हुए है!इसके अलग चौरासी चारणी पद का भी व्यवहार होता है!इससे यह पता चलता है कि चारण जाति मैं महाशक्ति के ८४ अवतार हो चुके है!
चारणों कि उत्पत्ति कि तरह इनके देवी-देवताओं के सम्बन्ध मैं भी अनेक लोक गाथाए प्रचलित है!एक लोक गाथानुसार चारणों की प्रथम कुलदेवी हिंगलाज थी,जिसका निवास स्थान पाकिस्तान के बलुचिस्थान प्रान्त मैं था!हिंगलाज नाम के अतिरिक्त हिंगलाज देवी का चरित्र या इसका इतहास अभी तक अप्राप्य है!हिंगलाज देवी से सम्बन्धित छंद गीत चिरजाए जरुर मिलती है!प्रसिद्ध है किसातो द्वीपों मैं सब शक्तियां रात्रि मैं रास रचाती है और प्रात:काल सब शक्तियां भगवती हिंगलाज के गिर मैं आ जाती है-
"सातो द्वीप शक्ति सब रात को रचात रास!
प्रात:आप तिहु मात हिंगलाज गिर मैं!!
ये देवी सूर्य से भी अधिक तेजस्वी है,और स्वेच्छा से अवतार धारण करती है!इस आदि शक्ति ने आठवी शताब्दी मैं सिंध प्रान्त मैं मामड़(मम्मट)के घर मैं आवड देवी के रूप मैं द्वितीय अवतार धारण किया! ये सात बहिने थी-आवड, गुलो, हुली, रेप्यली, आछो, चंचिक, और लध्वी! ये सब परम सुन्दरिया थी! कहते है कि इनकी सुन्दरता पर सिंध का यवन बादशाह हमीर सुमरा मुग्ध था!इसी कारण उसने अपने विवाह का प्रस्ताव भेजा पर इनके पिता के मना करने पर बादशाह ने उनको कैद कर लिया यह देखकर छ: देवियाँ टू सिंध से तेमडा पर्वत पर आ गई!एक बहिन काठियावाड़ के दक्षिण पर्वतीय प्रदेश मैं 'तांतणियादरा' नामक नाले के ऊपर अपना स्थान बनाकर रहने लगी!यह भावनगर कि कुलदेवी मानी जाति हैओर समस्त काठियावाड़ मैं भक्ति भाव से इसकी पूजा होती है!
जब आवड देवी ने तेमडा पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया तब इनके दर्शनाथ अनेक चारणों का आवागमन इनके स्थान कि और निरंतर होने लगा और इनके दर्शनाथ हेतु लोग समय पाकर यही राजस्थान मैं ही बस गए!इन्होने तेमडा नाम के राक्षस को मारा था, अत: इन्हे तेमडेजी भी कहते है!आवड जी का मुख्य स्थान जैसलमेर से बीस मील दूर एक पहाडी पर बना है!
पन्द्रहवी शताब्दी मैं राजस्थान अनेक छोटे छोटे राज्यों मैं विभक्त था!जागीरदारों मैं परस्पर बड़ी खिचातान थी और एक दूसरे को रियासतो मैं लुट खसोट करते थे, जनता मैं त्राहि त्राहि मची हुई थी!इस कष्ट के निवारणार्थ ही महाशक्ति हिंगलाज ने सुआप गाँव के चारण मेहाजी की धर्मपत्नी देवलदेवी के गर्भ से श्री करणीजी के रूप मैं अवतार ग्रहण किया !
"आसोज मास उज्जवल पक्ष सातम शुक्रवार!
चौदह सौ चम्मालवे करणी लियो अवतार!!
जन श्रुतियों और चयोगीतानुसार स्पष्ट है किश्री करणीजी अनेक आलोकिक कार्य किये! मारवाड़ मैं राव जोधा कि शक्ति स्थपित कर अपने ही कर कमलों के द्वारा जोधपुर के किले की नींव रखी! राव बीका ने करणीजी के आशीर्वाद से ही जात एवम मुसलमानो पर विजय प्राप्त कर बीकानेर राज्य की स्थापना की!मझधार मैं पड़ी नौका को किनारे लगाकर चित्तौड़ के सेठ झगडूशाह को उबारा !अपने मृत पुत्र लाखण के प्राण यमराज से ले कर आई और उन्हें पुनः जीवित किया! इस प्रकार अनेक अलोकिक कार्य करती हुई संवत १५९५ छेत्र शुक्ल नवमी,देह ज्योतिलीन हुई!उनके भौतिक देह त्यागने के सम्बन्ध मैं ये दोहा प्रचलित है!-
“ वर्ष डेढ़ सौ मास छ:,दिन उपरांत दोय!
देवी सिधाया देह सूं, जगत सुधारण जोय!!
महादेवी का देशनोक मैं स्थित चूहों का मन्दिर श्रदालू भक्तो एवम पर्यटको के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है!
चारण जाति शक्ति उपासको मैं एक मुख्य जाति है!इस जाति के व्यक्ति को दूसरी जातियाँ देवी-पुत्र के नाम से संबोधित करती है! यही कारण है कि महाशक्ति को अवतार लेने के लिए चारण जाति ही अनुकूल जान पड़ी!चारण जाति मैं देवी के अनेक अवतार हुए!राजस्तान मैं देवियो की जो सामान्य रूप से स्तुति की जाती है, उनमे नॉ लाख लोवडीयाल पद का व्यवहार किया जाता है!जिसका तात्पर्य है कि देवी के आज तक साधारण और असाधारण कुल नॉ लाख अवतार हुए है!इसके अलग चौरासी चारणी पद का भी व्यवहार होता है!इससे यह पता चलता है कि चारण जाति मैं महाशक्ति के ८४ अवतार हो चुके है!
चारणों कि उत्पत्ति कि तरह इनके देवी-देवताओं के सम्बन्ध मैं भी अनेक लोक गाथाए प्रचलित है!एक लोक गाथानुसार चारणों की प्रथम कुलदेवी हिंगलाज थी,जिसका निवास स्थान पाकिस्तान के बलुचिस्थान प्रान्त मैं था!हिंगलाज नाम के अतिरिक्त हिंगलाज देवी का चरित्र या इसका इतहास अभी तक अप्राप्य है!हिंगलाज देवी से सम्बन्धित छंद गीत चिरजाए जरुर मिलती है!प्रसिद्ध है किसातो द्वीपों मैं सब शक्तियां रात्रि मैं रास रचाती है और प्रात:काल सब शक्तियां भगवती हिंगलाज के गिर मैं आ जाती है-
"सातो द्वीप शक्ति सब रात को रचात रास!
प्रात:आप तिहु मात हिंगलाज गिर मैं!!
ये देवी सूर्य से भी अधिक तेजस्वी है,और स्वेच्छा से अवतार धारण करती है!इस आदि शक्ति ने आठवी शताब्दी मैं सिंध प्रान्त मैं मामड़(मम्मट)के घर मैं आवड देवी के रूप मैं द्वितीय अवतार धारण किया! ये सात बहिने थी-आवड, गुलो, हुली, रेप्यली, आछो, चंचिक, और लध्वी! ये सब परम सुन्दरिया थी! कहते है कि इनकी सुन्दरता पर सिंध का यवन बादशाह हमीर सुमरा मुग्ध था!इसी कारण उसने अपने विवाह का प्रस्ताव भेजा पर इनके पिता के मना करने पर बादशाह ने उनको कैद कर लिया यह देखकर छ: देवियाँ टू सिंध से तेमडा पर्वत पर आ गई!एक बहिन काठियावाड़ के दक्षिण पर्वतीय प्रदेश मैं 'तांतणियादरा' नामक नाले के ऊपर अपना स्थान बनाकर रहने लगी!यह भावनगर कि कुलदेवी मानी जाति हैओर समस्त काठियावाड़ मैं भक्ति भाव से इसकी पूजा होती है!
जब आवड देवी ने तेमडा पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया तब इनके दर्शनाथ अनेक चारणों का आवागमन इनके स्थान कि और निरंतर होने लगा और इनके दर्शनाथ हेतु लोग समय पाकर यही राजस्थान मैं ही बस गए!इन्होने तेमडा नाम के राक्षस को मारा था, अत: इन्हे तेमडेजी भी कहते है!आवड जी का मुख्य स्थान जैसलमेर से बीस मील दूर एक पहाडी पर बना है!
पन्द्रहवी शताब्दी मैं राजस्थान अनेक छोटे छोटे राज्यों मैं विभक्त था!जागीरदारों मैं परस्पर बड़ी खिचातान थी और एक दूसरे को रियासतो मैं लुट खसोट करते थे, जनता मैं त्राहि त्राहि मची हुई थी!इस कष्ट के निवारणार्थ ही महाशक्ति हिंगलाज ने सुआप गाँव के चारण मेहाजी की धर्मपत्नी देवलदेवी के गर्भ से श्री करणीजी के रूप मैं अवतार ग्रहण किया !
"आसोज मास उज्जवल पक्ष सातम शुक्रवार!
चौदह सौ चम्मालवे करणी लियो अवतार!!
जन श्रुतियों और चयोगीतानुसार स्पष्ट है किश्री करणीजी अनेक आलोकिक कार्य किये! मारवाड़ मैं राव जोधा कि शक्ति स्थपित कर अपने ही कर कमलों के द्वारा जोधपुर के किले की नींव रखी! राव बीका ने करणीजी के आशीर्वाद से ही जात एवम मुसलमानो पर विजय प्राप्त कर बीकानेर राज्य की स्थापना की!मझधार मैं पड़ी नौका को किनारे लगाकर चित्तौड़ के सेठ झगडूशाह को उबारा !अपने मृत पुत्र लाखण के प्राण यमराज से ले कर आई और उन्हें पुनः जीवित किया! इस प्रकार अनेक अलोकिक कार्य करती हुई संवत १५९५ छेत्र शुक्ल नवमी,देह ज्योतिलीन हुई!उनके भौतिक देह त्यागने के सम्बन्ध मैं ये दोहा प्रचलित है!-
“ वर्ष डेढ़ सौ मास छ:,दिन उपरांत दोय!
देवी सिधाया देह सूं, जगत सुधारण जोय!!
महादेवी का देशनोक मैं स्थित चूहों का मन्दिर श्रदालू भक्तो एवम पर्यटको के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है!
3 comments:
आदरणीय आनद जी,आप का ब्लोग पढ़ कर बहुत ख़ुशी हुई....जब भी मे किसी रचनाकार से मिलता हूँ तो ऐसा लगता है मे किसी बहुत धनवान व्यक्ती से मील रहा हूँ.....मैं चाहता हूँ आप अपनी रचनाओ का भी एक ब्लोग बनाय....यंहा पर मे एक गुस्ताखी करना चाहता हूँ की आज जब समय बहुत गति से आगे बढ़ रहा है....हमे अपने संस्कारों की मजबूती के लिए विज्ञान का दामन पकड़ लेना चाहिए ....वरना नई पीढ़ी हमे और हमारे संस्कारों को ठुकरा देगी...मेरा कहना है की हमे करनी माता को एक देवी के रुपमे नहीं बल्कि एक महान नारी के रूप मे जानना और समझ na चाहिए ......ताकि आने वाली सदिया जो की वैज्ञानिक नजरिये से हेर चीज को समजना चाहती है......
jnसाम्राज्यवाद चाहता है की हम अपनी धार्मिक और जातिगत बातों मे उलझे रहे और ताकि वो हमे आर्थिक सामाजिक और साँस्कृतिक गुलाम बना सके......क्यूंकि वो जानता है की विज्ञान ही धर्म और भगवान को मार सकता है......इसीलिए वर्ल्ड बैंक जातिगत और धार्मिक कामो पर भरपूर पैसा खर्च कर रहा है........और हमारी सरकारे पूरी तरह बिक चुकी है...........गरीब और गरीब हो रहा है......बेरोजगारी बेताहासा बढ़ रही है......जीवन नरक बनता जा रहा है.........बाकि आप बताय .....कुछ जयादा ही बोल गया ,छोटा भाई समज कर माफ़ कर देना........वैसे मे आपकी कविताओ का बहुत फेन हूँ .....चाहूँगा आप का प्यार मिलता रहे.......चंद्रपाल,मुम्बई......
jnसाम्राज्यवाद चाहता है की हम अपनी धार्मिक और जातिगत बातों मे उलझे रहे और ताकि वो हमे आर्थिक सामाजिक और साँस्कृतिक गुलाम बना सके......क्यूंकि वो जानता है की विज्ञान ही धर्म और भगवान को मार सकता है......इसीलिए वर्ल्ड बैंक जातिगत और धार्मिक कामो पर भरपूर पैसा खर्च कर रहा है........और हमारी सरकारे पूरी तरह बिक चुकी है...........गरीब और गरीब हो रहा है......बेरोजगारी बेताहासा बढ़ रही है......जीवन नरक बनता जा रहा है.........बाकि आप बताय .....कुछ जयादा ही बोल गया ,छोटा भाई समज कर माफ़ कर देना........वैसे मे आपकी कविताओ का बहुत फेन हूँ .....चाहूँगा आप का प्यार मिलता रहे.......चंद्रपाल,मुम्बई......
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